खैरागढ़: शाला में आरोप-प्रत्यारोप से मचा बवाल, प्राचार्य ने लगाए गंभीर आरोप और फिर की पलटवार।

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला गातापार जंगल में इन दिनों माहौल पूरी तरह गरमा गया है। प्रभारी प्राचार्य डॉ. ममता अग्रवाल और शिक्षिका रेनू मालवी के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मामला जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंच चुका है, जिससे शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मच गया है।
प्रभारी प्राचार्य डॉ. ममता अग्रवाल ने लिखित
शिकायत में साफ तौर पर आरोपों को “बेबुनियाद और साजिश” करार देते हुए कहा है कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि उनके कार्यकाल (2016 से अब तक) में कभी भी किसी शिक्षक-शिक्षिका के साथ भेदभाव या पक्षपात नहीं किया गया।
“मानसिक प्रताड़ना का आरोप झूठा, अनुशासन पर सवाल उठाने की साजिश”
प्राचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित शिक्षिका द्वारा लगाए गए मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय में हमेशा वरिष्ठता क्रम और नियमों का पालन किया गया है, और सभी को समान अवसर दिए गए हैं।
60 दिन की छुट्टी बना विवाद की जड़
मामले में सबसे बड़ा विवाद उस समय खड़ा हुआ जब संबंधित शिक्षिका ने 3 फरवरी से 4 अप्रैल 2026 तक लगभग 60 दिनों का अवकाश मांगा। प्राचार्य के अनुसार, उस दौरान बोर्ड परीक्षा नजदीक थी, ऐसे में विज्ञान विषय के अध्यापन पर असर पड़ता। इसी कारण अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया, जिसे लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया।
उपस्थिति रजिस्टर से लेकर ड्यूटी तक—हर आरोप का दिया जवाब
प्राचार्य ने उपस्थिति रजिस्टर में गड़बड़ी, अनुचित लाभ देने और ड्यूटी में अनियमितता जैसे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विद्यालय में हर कार्य नियमानुसार हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व वर्षों में उन्हें परीक्षा केंद्राध्यक्ष बनाकर अन्य विद्यालयों में भेजा गया, उस दौरान संबंधित शिक्षिका को ही प्रभार सौंपा गया था।
अब सबकी नजर जिला शिक्षा अधिकारी के फैसले पर
पूरा मामला अब जिला शिक्षा अधिकारी के पास विचाराधीन है। शिक्षा विभाग में यह विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि जांच होती है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं





