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खैरागढ़ में पुलिस सक्रिय, बाकी विभागों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

खैरागढ़ में पुलिस सक्रिय, बाकी विभागों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
खैरागढ़। जिला गठन के बाद जहां आम जनता को बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद थी, वहीं वर्तमान स्थिति कई विभागों की निष्क्रियता को उजागर करती नजर आ रही है। जिले में यदि कोई विभाग लगातार सक्रिय दिखाई देता है तो वह केवल पुलिस विभाग है, जो शहर से लेकर गांव तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कानून व्यवस्था बनाए रखने से लेकर अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई तक पुलिस लगातार मैदान में नजर आती है।
वहीं दूसरी ओर कई विभागों के अधिकारी कार्यालयों तक सीमित होकर केवल फाइलों को लाल-पीली करने में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। आम लोगों का आरोप है कि कई विभागों में जनता की समस्याओं के समाधान की बजाय “टेबल के नीचे के व्यापार” की चर्चाएं अधिक सुनाई देती हैं। शहर और गांवों में प्रशासनिक सक्रियता का अभाव साफ दिखाई देता है।
खैरागढ़ के प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते अतिक्रमण के बावजूद प्रशासन की कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। जहां नियमों के तहत सख्त अभियान चलना चाहिए, वहां जिम्मेदार विभाग मौन बने हुए हैं। इससे आम नागरिकों को यातायात और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे अधिक चर्चा आबकारी विभाग की कार्यशैली को लेकर हो रही है। लोगों का कहना है कि जिन अवैध शराब कारोबारों पर कार्रवाई करना आबकारी विभाग की जिम्मेदारी है, वहां भी कार्रवाई करते हुए पुलिस विभाग ही नजर आता है। इससे आबकारी विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक आबकारी विभाग में “लेनदेन और सेटिंग” की चर्चाएं आम हो चुकी हैं, जो विभाग की छवि पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती हैं।
अब जनता की नजर जिला प्रशासन और कलेक्टर पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आखिर कब जिम्मेदार अधिकारी अपनी “कुंभकर्णी नींद” से जागेंगे और जिले में सुशासन तथा पारदर्शिता की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दैनिक सरस्वती संकेत
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