गरीबों के ठेले हटे, भू-माफियाओं पर मेहरबानी?
कोर्ट के सामने सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग, 8 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं
खैरागढ़। शहर में प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्षता और कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला एडवर्ड पार्क के सामने न्यायालय परिसर से लगी नजूल भूमि का है, जहां सरकारी जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग और कब्जे का बड़ा मामला सामने आने के बावजूद आठ महीने बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि नजूल प्लॉट नंबर 114 एवं 115, मूल खसरा नंबर 169 की जमीन को बिना वैधानिक अनुमति 22 टुकड़ों में विभाजित कर अलग-अलग लोगों को बेच दिया गया। जांच दस्तावेजों के अनुसार वर्तमान में इस भूमि पर 17 कब्जाधारी मौजूद हैं तथा कई हिस्सों में पक्के निर्माण भी कर लिए गए हैं।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार खसरा नंबर 169 का कुल रकबा 2.259 हेक्टेयर दर्ज है और इसकी भूमि प्रकृति “छोटे झाड़ का जंगल एवं घास भूमि” अंकित है। नियमानुसार ऐसी भूमि का निजी उपयोग, प्लाटिंग, विक्रय अथवा व्यावसायिक हस्तांतरण नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद लगभग 85,627 वर्गफीट सरकारी जमीन की रजिस्ट्रियां अलग-अलग लोगों के नाम किए जाने का मामला सामने आया है।
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया है कि संबंधित भूमि का कोई वैध ले-आउट स्वीकृत नहीं किया गया था। विभाग ने पूरी प्रक्रिया को अवैध प्लाटिंग की श्रेणी में माना है। इसके बाद 29 सितंबर 2025 को कलेक्टर कार्यालय द्वारा नगर पालिका परिषद को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन आदेश के आठ महीने बाद भी न तो अवैध निर्माण हटाए गए और न ही प्लाटिंग से जुड़े जिम्मेदार लोगों पर कोई कठोर कार्रवाई हुई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस न्यायालय परिसर के सामने गरीबों और छोटे व्यवसायियों के ठेले हटाने की तैयारी की गई, उसी परिसर के ठीक सामने सरकारी जमीन पर हुए कथित अवैध कब्जे आज भी जस के तस खड़े हैं। मुख्य मार्ग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने माहौल बनाया, जिसके बाद कई छोटे दुकानदारों ने डर के कारण अपना सामान तक समेट लिया। पालिका कर्मचारी और पुलिस बल घंटों मौके पर मौजूद रहे, लेकिन नगर पालिका और राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। अंततः केवल दो ठेले जब्त कर औपचारिक कार्रवाई पूरी कर दी गई।
इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीबों और छोटे व्यवसायियों पर कार्रवाई तुरंत हो जाती है, लेकिन सरकारी जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग कर करोड़ों की संपत्ति खड़ी करने वालों पर कार्रवाई फाइलों और विभागीय पत्राचार तक सीमित रह जाती है।
सूत्रों के अनुसार “मेंटेनेंस खसरा” के नाम पर शहर की अन्य जमीनों में भी इसी प्रकार कब्जे और प्लाटिंग का खेल लंबे समय से चल रहा है। अटल परिसर और कोर्ट परिसर के आसपास की जमीनों को लेकर भी पूर्व में विवाद सामने आ चुके हैं। मामले में उप पंजीयक कार्यालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति के बिना रजिस्ट्रियां की गईं, जबकि राजस्व विभाग, एसडीएम कार्यालय और नगर निवेश विभाग अपनी जांच में संबंधित प्लाटिंग को अवैध बता चुके हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय एसआईटी जांच कराने, सभी 22 रजिस्ट्रियों को निरस्त करने, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने तथा भू-माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है।
मामले में नगर पालिका परिषद के सीएमओ पुनीत राम वर्मा ने कहा कि उन्होंने दो महीने पहले ही पदभार ग्रहण किया है और पूरी फाइल का परीक्षण करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट कर पाएंगे। वहीं नजूल अधिकारी रेणुका रात्रे ने बताया कि अवैध प्लाटिंग की पुष्टि होने के बाद नगर पालिका को नियमानुसार कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक वहां से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन की कार्रवाई केवल कमजोर और छोटे कारोबारियों तक सीमित रहेगी, या फिर सरकारी जमीन पर हुए कथित अवैध कब्जों और प्लाटिंग पर भी वैसी ही सख्ती दिखाई जाएगी।
संपादक : राजेंद्र सिंह चंदेल
दैनिक सरस्वती संकेत, खैरागढ़
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