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आरटीई प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग पर निजी स्कूलों का बड़ा फैसला, असहयोग आंदोलन की घोषणा

  1. खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं होने से नाराज निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन का ऐलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की जिला इकाई ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र सौंपकर साफ कर दिया है कि जब तक राशि नहीं बढ़ती, तब तक जिले के सभी निजी विद्यालय विभागीय कार्यों में सहयोग नहीं करेंगे

निजी रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता, कई पदाधिकारी रहे मौजूद

सोमवार दोपहर 3 बजे जिला अस्पताल के पास स्थित एक निजी रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन के जिला अध्यक्ष राजेन्द्र चंदेल, जिला सचिव कृष्ण कुमार सोनी, अशोक वर्मा, सुरेश चौरे, मनोहर सोनवानी, रविन्द्र सोनी, पार्वती सोनी, राजेश देवांगन, गोपाल राम चंदेल, सुनील तोमर, धनीराम डोंगरे, नुसरत कुरैशी और शिल्पी विश्वास सहित कई निजी विद्यालय संचालक उपस्थित रहे। पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि से स्कूलों का संचालन करना बेहद कठिन हो गया है।

13 वर्षों से नहीं बढ़ी राशि, कोर्ट आदेश का भी हवाला

संघ का कहना है कि आरटीई के तहत गरीब विद्यार्थियों को पढ़ाने के बदले सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि पिछले लगभग 13 वर्षों से यथावत है। इस संबंध में हाई कोर्ट बिलासपुर में दायर याचिका (डब्ल्यूपीसी 4988/2025) में 19 सितंबर 2025 को न्यायालय ने राज्य सरकार को छह माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे निजी स्कूल संचालकों में भारी नाराजगी है।

प्रति छात्र राशि में बड़े इजाफे की मांग

संगठन ने प्रति छात्र प्रतिवर्ष मिलने वाली राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की मांग रखी है। प्राथमिक कक्षाओं के लिए ₹7000 से बढ़ाकर ₹18,000, माध्यमिक के लिए ₹11,500 से बढ़ाकर ₹22,000 तथा हाई स्कूल के लिए ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि बढ़ी हुई राशि पिछले तीन वर्षों से प्रभावी मानकर बकाया भुगतान भी किया जाए।

“गरीब बच्चों की शिक्षा पर सरकार गंभीर नहीं”

पत्र में आरोप लगाया गया है कि सरकार गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले वास्तविक खर्च के प्रति संवेदनशील नहीं है। संचालकों का कहना है कि वर्तमान दरों पर आरटीई के तहत पढ़ाई जारी रखना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो गया है, फिर भी निजी स्कूल सामाजिक दायित्व निभाते हुए बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

प्रदेश स्तर के निर्णय के बाद जिला इकाई सक्रिय

01 मार्च 2026 को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से असहयोग आंदोलन का निर्णय लिया गया, जिसके बाद जिला इकाई ने भी तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रशासन को औपचारिक सूचना दे दी। जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह चंदेल और जिलासचिव कृष्ण कुमार सोनी ने संयुक्त रूप से आंदोलन की घोषणा की।

विभागीय कामकाज में सहयोग से इंकार

असहयोग आंदोलन के तहत निजी स्कूलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे स्कूल शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी या नोडल प्राचार्यों के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं करेंगे। विभाग द्वारा जारी पत्र, आदेश या नोटिस का जवाब भी नहीं दिया जाएगा।

प्रशासन को भेजी गई प्रतिलिपि

आंदोलन की सूचना कलेक्टर, खैरागढ़ और छुईखदान के विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा जिले के सभी आरटीई नोडल प्राचार्यों को भी भेजी गई है, ताकि प्रशासन पूरी स्थिति से अवगत रहे।

लंबा चला तो प्रभावित हो सकती है पढ़ाई

यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो जिले में आरटीई के तहत अध्ययनरत हजारों गरीब विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा विभाग का कामकाज प्रभावित हो सकता है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामला तेजी से तूल पकड़ता दिख रहा है।

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