खैरागढ़ में शिक्षिका के साथ अत्याचार!

15 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिला हक, बीमार बच्ची के बीच झेली मानसिक प्रताड़ना
खैरागढ़ (छत्तीसगढ़)। शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक महिला शिक्षिका को अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला गाता पर जंगल में पदस्थ शिक्षिका रेनू मालवी ने प्रभारी प्राचार्य डॉ. ममता अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिक्षिका का कहना है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिला कर्मचारियों को 730 दिनों का संतान पालन अवकाश देने का स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन उन्होंने अब तक मात्र 99 दिन का ही उपयोग किया, इसके बावजूद उनके आवेदन बार-बार खारिज कर दिए गए। इतना ही नहीं, उन्हें आवेदन की पावती तक नहीं दी गई और सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए खुद से आवेदन निरस्त करने का दबाव बनाया गया।
बीमार बच्ची, फिर भी नहीं मिली राहत
मामले ने तब गंभीर रूप ले लिया जब शिक्षिका की बेटी, जो 12वीं बोर्ड की छात्रा है, गंभीर रूप से बीमार हो गई। परीक्षा के दौरान उसकी नाक की नस फट गई और लगातार ब्लीडिंग होती रही। एकल अभिभावक होने के बावजूद शिक्षिका को न तो अवकाश मिला और न ही मानवीय संवेदनशीलता दिखाई गई।
उच्च अधिकारियों के आदेश की भी अनदेखी
स्थिति को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शिक्षिका की ड्यूटी खैरागढ़ के पदुमलाल पुन्नालाल बक्शी स्कूल के कंट्रोल रूम में लगाई गई, ताकि वह बच्ची की देखभाल के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा सके। लेकिन आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य ने इस आदेश को भी दरकिनार कर उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया, जो सीधे तौर पर उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना है।
फिर भी निभाई जिम्मेदारी, उल्टा मिली शिकायत
शिक्षिका ने 20 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक कंट्रोल रूम में अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाई। इसके बाद जब उन्होंने मूल्यांकन कार्य में भाग लिया, तो उनके खिलाफ ही शिकायत दर्ज करा दी गई कि उन्होंने बिना अनुमति काम किया।
भेदभाव और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप
रेनू मालवी ने यह भी आरोप लगाया है कि वरिष्ठता में दूसरे स्थान पर होने के बावजूद उन्हें कभी प्रभार नहीं दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भी लगातार दूर रखा गया।
मानसिक प्रताड़ना से बिगड़ रही हालत
लगातार हो रही मानसिक प्रताड़ना का असर अब उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को विस्तृत शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
👉 अब बड़ा सवाल यह है कि क्या एक माँ को अपने बीमार बच्चे की देखभाल के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा?
👉 क्या शासन के नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे?
दैनिक “सरस्वती संकेत” की मांग:
इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी कर्मचारी के साथ ऐसा अन्याय न हो सके।




