सामान्य प्रशासन विभाग आदेश की खुली अवेहलना : 15 स्मरण पत्रों के बाद भी केसीजी जिले में अधूरा आरटीई पोर्टल पंजीयन
आरटीआई पोर्टल पर जनसूचना अधिकारियों का पंजीयन अधूरा, पारदर्शिता पर संकट
सरस्वती संकेत समाचार खैरागढ़.
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2022 में आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की थी। उद्देश्य था कि नागरिक घर बैठे किसी भी विभाग से जानकारी ले सकें। लेकिन खैरागढ़ जिले में प्रशासनिक सुस्ती और अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह व्यवस्था ठप पड़ी है।
आंकड़े बताते हैं हकीकत
जिले में अब तक कुल 287 जनसूचना अधिकारियों ने पोर्टल पर अपनी आईडी बनाई है। इसमें पंचायत विभाग सबसे आगे है—219 आईडी ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और आरईएस के अधिकारियों द्वारा बनाई गई है। इसके अलावा अन्य विभागों की केवल 68 आईडी दर्ज हैं। यानी पंचायत विभाग को छोड़ दें तो जिले के अधिकांश विभाग पारदर्शिता की व्यवस्था में पीछे हैं।
बार-बार दिए गए निर्देश, फिर भी लापरवाही
सामान्य प्रशासन विभाग ने 29 जनवरी 2022 को पहला पत्र जारी कर जनसूचना अधिकारियों (PIO) और प्रथम अपीलीय अधिकारियों (FAA) के स्व-पंजीयन का निर्देश दिया था। इसके बाद 15 बार स्मरण पत्र जारी हुए—जिनमें 02 फरवरी 2022, 07 मार्च 2022, 13 अप्रैल 2022, 08 जून 2022, 03 अगस्त 2022, 17 अक्टूबर 2022, 21 नवम्बर 2022, 29 मार्च 2023, 23 मई 2023, 23 अगस्त 2023, 08 नवम्बर 2023, 08 दिसम्बर 2023, 25 अक्टूबर 2024 और 19 मार्च 2025 प्रमुख हैं। बावजूद इसके जिले के कई विभागों ने पंजीयन की कार्यवाही पूरी नहीं की।
आयोग के निर्देशों की अनदेखी
राज्य सूचना आयोग को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि विभागों में नियुक्त जनसूचना अधिकारियों का पोर्टल पर नाम दर्ज ही नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार केसीजी जिले के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, खनिज, खाद्य, खेल एवं युवक कल्याण, ग्रामोद्योग, आयुष, पीडब्ल्यूडी, श्रम, नगर पालिका-नगर पंचायत, पशु चिकित्सा जैसे कई दफ्तर अब तक अधूरे हैं।
कई विभाग आईडी बनाए लेकिन जानकारी नहीं दे रहे है
जानकारी के मुताबिक कृषि, पंजीयक, विद्युत, मत्स्य, शिक्षा, पुलिस, उद्यानिकी, पंचायत, परिवहन और महिला बाल विकास विभाग जैसे दफ्तरों का आईडी तो पोर्टल पर मौजूद है, लेकिन वे ऑनलाइन जवाब नहीं दे रहे है। जिसमें सबसे अधिक सुस्त मत्स्य विभाग है।
जनता पर बढ़ रहा बोझ
ऑनलाइन सुविधा अधूरी होने से लोगों को अभी भी विभागीय दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे न केवल समय और समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि आवेदकों को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। जबकि पोर्टल से शुल्क जमा करने, अपील दायर करने और आदेश प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया घर बैठे संभव है।
पंचायतें आगे, जिला पंचायत पीछे
खैरागढ़ जिले की 221 पंचायतों में से 215 ने पंजीयन कर तत्परता दिखाई है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से स्वयं जिला पंचायत का जनसूचना अधिकारी ही अब तक पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हुआ है।
पारदर्शिता पर संकट
आरटीआई पोर्टल से जनसूचना अधिकारी ऑनलाइन शुल्क की मांग, आवेदन स्वीकार-निरस्त अथवा अंतरित कर सकते हैं। प्रथम अपीलीय अधिकारी भी नोटिस और आदेश अपलोड कर सकते हैं। इससे डाक खर्च और अनावश्यक पत्राचार की झंझट खत्म हो सकती है। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से शासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं और पारदर्शिता संकट में है।
शासन के सख्त निर्देश
सामान्य प्रशासन विभाग ने एक बार फिर सभी विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों और संभागायुक्तों को आदेश दिया है कि सभी जनसूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी तत्काल पंजीयन करें और प्रमाणपत्र राज्य सूचना आयोग को भेजें।
विभाग ने पंजीयन नहीं किया तो उसकी जिम्मेदारी- रात्रे
संयुक्त कलेक्टर रेणुका रात्रे ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग से जो पत्र आया था, उसे टीएल बैठक में सभी अधिकारियों को पढ़कर सुनाया गया और लिखित में भी आरटीआई पोर्टल पर पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए थे। अब यदि विभागों ने पंजीयन नहीं किया है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। कार्यवाही के संबंध में कौन-सा नियम लागू होगा, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है, उसे देखना पड़ेगा।