*प्रशासनिक प्रशिक्षण की कलात्मक बयार : डिप्टी कलेक्टरों का सांस्कृतिक अनुभव*
सरस्वती संकेत समाचार खैरागढ़, 29 जून
“प्रशासन और कला का एकात्म”* — इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के प्रशिक्षणरत *14 प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर्स* ने रविवार को *विश्वविख्यात इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़* का प्रेरणादायक अध्ययन भ्रमण किया। यह टीम *लोक सेवा आयोग* से चयनित अधिकारियों की थी, जो वर्तमान में परिचयात्मक प्रशिक्षण में संलग्न हैं।
*कला और विरासत से हुआ आत्मिक साक्षात्कार*
अधिकारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित *ऐतिहासिक दरबार हॉल, प्राचीन महल, राधा-कृष्ण मंदिर, संग्रहालय, शेर गेट*,*दृश्यकला संकाय* तथा समृद्ध *आर्ट गैलरी* का अवलोकन कर वहां की विरासत व संस्कृति की झलक प्राप्त की। यह अनुभव न केवल शैक्षिक रहा, बल्कि शासन में संवेदनशीलता की महत्ता को भी रेखांकित करता है।
*पाठ्यक्रमों की जानकारी से मिली शैक्षिक अंतर्दृष्टि*
भ्रमण के पश्चात प्रशिक्षुओं ने *माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा* से शिष्टाचार भेंट की और विश्वविद्यालय के *शैक्षणिक ढांचे, कलात्मक पाठ्यक्रमों और भविष्य की योजनाओं* के बारे में व्यापक जानकारी प्राप्त की। चर्चा सौहार्द्रपूर्ण रही, जिसमें विश्वविद्यालय के विकास को लेकर उत्साहजनक संवाद हुआ। इस भ्रमण कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी श्री टंकेश्वर प्रसाद साहू, एस डी एम खैरागढ़ और सहायक नोडल अधिकारी सहायक कुलसचिव श्री विजय सिंहउपस्थित रहे।
सांस्कृतिक संवाद और प्रशासनिक दृष्टिकोण का संगम
यह भ्रमण न केवल एक अध्ययन यात्रा रही, बल्कि कला एवं प्रशासन के समन्वय की एक नई दिशा का संकेत भी बनी। अधिकारियों का यह अनुभव निश्चित ही आने वाले प्रशासनिक दायित्वों को अधिक संवेदनशील और सृजनशील दृष्टिकोण से निभाने में सहायक सिद्ध होगा।