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बस किराए की मार से परेशान खैरागढ़ की जनता, आठ साल से रेल का इंतजार; आखिर कब दौड़ेगी ट्रेन?

बस किराए की मार से परेशान खैरागढ़ की जनता, आठ साल से रेल का इंतजार; आखिर कब दौड़ेगी ट्रेन?

कटघोरा–डोंगरगढ़ रेल परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी से जगी उम्मीद, लेकिन जनता को अब चाहिए जमीन पर काम और समयसीमा

खैरागढ़ | दैनिक सरस्वती संकेत

खैरागढ़। जिले में रेल सुविधा की मांग एक बार फिर चर्चा में है। एक ओर बसों के बढ़ते किराए से आम यात्रियों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर खैरागढ़ को रेल नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद वर्षों से अधर में है। अब कटघोरा–तखतपुर–मुंगेली–कवर्धा–खैरागढ़–डोंगरगढ़ रेल परियोजना को लेकर राज्य मंत्रिपरिषद के ताजा फैसले से लोगों में नई उम्मीद जगी है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि खैरागढ़ में रेल लाइन का निर्माण कब शुरू होगा और यात्रियों को ट्रेन की सुविधा कब मिलेगी?

बस ही सहारा, किराया बढ़ने से बढ़ी परेशानी

वर्तमान में खैरागढ़ से राजनांदगांव, डोंगरगढ़, कवर्धा तथा अन्य शहरों की यात्रा के लिए बड़ी संख्या में लोग बसों पर निर्भर रहते हैं। विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा के काम से बाहर जाने वाले नागरिकों के लिए बस यात्रा महत्वपूर्ण साधन है।

स्थानीय स्तर पर बस किराए में बढ़ोतरी की शिकायतों के बीच यात्रियों का कहना है कि सफर का खर्च बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। दैनिक आवागमन करने वालों के लिए यह परेशानी और गंभीर हो जाती है। ऐसे में रेल सुविधा केवल परिवहन का विकल्प नहीं, बल्कि किफायती और बेहतर आवागमन की लंबे समय से चली आ रही आवश्यकता भी है।

295 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना से जुड़ी उम्मीद

प्रस्तावित कटघोरा–डोंगरगढ़ रेल परियोजना की लंबाई लगभग 295 किलोमीटर बताई गई है। इसका प्रस्तावित मार्ग कटघोरा से तखतपुर, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

27 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह निर्णय परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालांकि, निवेश संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिलना और रेलवे लाइन का वास्तविक निर्माण शुरू होना अलग-अलग चरण हैं। इसलिए अब लोगों की निगाहें आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया, भूमि अधिग्रहण, निर्माण की शुरुआत और आधिकारिक समयसीमा पर टिकी हैं।

आठ साल से उम्मीद, अब जवाबदेही की बारी

रेल सुविधा की मांग को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा होती रही है। घोषणाओं और राजनीतिक बयानों के बीच आम नागरिकों की अपेक्षा है कि इस बार परियोजना आगे बढ़े और उसका लाभ खैरागढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों को मिले।

परियोजना को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अपने-अपने प्रयासों और सरकार के फैसलों का उल्लेख कर रहे हैं। वहीं, विपक्ष की ओर से निर्माण कार्य शुरू नहीं होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन दावों के बीच जरूरी है कि संबंधित विभाग परियोजना की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे, ताकि जनता को स्पष्ट जानकारी मिल सके।

जनता के सवाल सीधे हैं—भूमि अधिग्रहण की स्थिति क्या है? निर्माण कार्य कब शुरू होगा? खैरागढ़ में प्रस्तावित स्टेशन कहां बनेगा? और पहली यात्री ट्रेन चलने की संभावित समयसीमा क्या है?

खैरागढ़ की पहचान बड़ी, परिवहन के विकल्प सीमित

खैरागढ़ की पहचान संगीत, शिक्षा, संस्कृति और व्यापार के क्षेत्र में है। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के कारण यहां देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी आते हैं। बेहतर रेल संपर्क विकसित होने से विद्यार्थियों, व्यापारियों, पर्यटकों और आम यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलने की संभावना है।

रेल संपर्क से क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, ये लाभ तभी वास्तविक रूप लेंगे, जब परियोजना का निर्माण पूरा होगा और नियमित रेल सेवा शुरू होगी।

राजनीतिक श्रेय से ज्यादा जरूरी है काम की प्रगति

रेल परियोजना को लेकर राजनीतिक श्रेय लेने और एक-दूसरे पर सवाल उठाने से अधिक महत्वपूर्ण है कि संबंधित एजेंसियां निर्माण की स्थिति स्पष्ट करें। जनता को यह जानने का अधिकार है कि परियोजना किस चरण में है, अब तक कौन-कौन सी प्रक्रियाएं पूरी हुई हैं और अगला कदम क्या होगा।

यदि परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं आगे बढ़ती हैं, तो खैरागढ़ को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रगति संभव हो सकती है। लेकिन केवल मंजूरी की खबर से यात्रियों को तत्काल राहत नहीं मिलेगी। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्माण और उसके बाद रेल परिचालन आवश्यक है।

अब घोषणा नहीं, धरातल पर परिणाम चाहिए

खैरागढ़ के नागरिकों की अपेक्षा है कि राज्य सरकार, रेल मंत्रालय और संबंधित रेलवे कॉर्पोरेशन परियोजना की अद्यतन स्थिति सार्वजनिक करें। साथ ही भूमि अधिग्रहण, निर्माण की शुरुआत और कार्य पूरा होने की समयसीमा के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जाए।

बस किराए का बढ़ता बोझ और रेल सुविधा का लंबा इंतजार क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल हैं। कैबिनेट के ताजा फैसले से उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन आम जनता के लिए वास्तविक राहत उस दिन होगी, जब रेल लाइन का निर्माण दिखाई देगा और खैरागढ़ से ट्रेन के परिचालन का रास्ता साफ होगा।

अब सवाल यही है—खैरागढ़ की जनता को रेल सुविधा के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?

दैनिक सरस्वती संकेत की जनहित में मांग है कि संबंधित विभाग रेल परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण की संभावित समयसीमा और खैरागढ़ में प्रस्तावित रेल सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करे.

राजेंद्र सिंह चंदेल प्रधान संपादक

दैनिक सरस्वती संकेत | खैरागढ़, जिला KCG, छत्तीसगढ़

सटीक | निष्पक्ष | निर्भीक

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