[the_ad id="217"]

500 करोड़ के कार्यों में कथित घोटाला, छुईखदान जल संसाधन संभाग जांच के घेरे में

500 करोड़ के कार्यों में कथित घोटाला, छुईखदान जल संसाधन संभाग जांच के घेरे में

खैरागढ़। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के जल संसाधन संभाग छुईखदान में लगभग 500 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में सेवानिवृत्त सहायक वर्ग-3 एम. उपाध्याय द्वारा मुख्यमंत्री को विस्तृत शिकायत भेजी गई है, जिसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।

करोड़ों के काम में अनियमितताओं का आरोप

शिकायत के अनुसार वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच विभाग को लगभग 500 करोड़ रुपये विभिन्न निर्माण कार्यों हेतु आवंटित किए गए थे। आरोप है कि इस राशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया तथा अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से भारी वित्तीय अनियमितताएं की गईं।

कई अधिकारी-कर्मचारी संदेह के घेरे में

शिकायत में कार्यपालन अभियंता बी.के. मरकाम, सहायक अभियंता केतन किशोर साहू, अविनाश नायक, सहायक वर्ग-3 करूणेश मेश्राम, सहायक मानचित्रकार कमल नारायण ठाकुर, स्थल सहायक लोकेश शर्मा एवं सहायक वर्ग-2 अजय चन्द्राकर के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी पर संयुक्त रूप से नियम विरुद्ध कार्य करने और भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के आरोप लगाए गए हैं।

रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि लंबित ग्रेच्युटी भुगतान के एवज में 55 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। राशि नहीं देने पर न्यायालय आदेश के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

4 करोड़ की मरम्मत राशि पर सवाल

वार्षिक मरम्मत एवं संधारण के लिए स्वीकृत लगभग 4 करोड़ रुपये के कार्यों में जमीनी स्तर पर काम नहीं होने का दावा किया गया है। आरोप है कि कागजों में कार्य दर्शाकर राशि का दुरुपयोग किया गया।

फर्जी बिल और निविदा में गड़बड़ी

निविदा प्रक्रिया में ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर फर्जी बिल, ड्राइंग एवं डिजाइन के नाम पर भुगतान कराने के आरोप लगाए गए हैं। विशेष रूप से तकनीकी स्तर पर गंभीर अनियमितताओं की बात कही गई है।

सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के आरोप

कार्यपालन अभियंता पर सरकारी वाहन के दुरुपयोग, फर्जी लॉगबुक एंट्री और ईंधन खर्च में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत में निजी उपयोग के लिए भी सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल का उल्लेख है।

गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर सवाल

अधिकारियों की मुख्यालय में अनुपस्थिति के कारण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने की बात कही गई है। आरोप है कि मानकों की अनदेखी कर कार्यों में लीपापोती की गई।

संगठित कमीशन तंत्र का दावा

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि विभाग में कमीशन आधारित एक संगठित तंत्र कार्य कर रहा है, जिसमें विभिन्न अधिकारी समन्वय बनाकर कार्य करते हैं।

नियम विरुद्ध पदस्थापन और कार्य आवंटन

कई कर्मचारियों को उनके पद के विपरीत कार्य सौंपे जाने तथा नियमों के विरुद्ध संलग्नीकरण के आरोप भी लगाए गए हैं, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने सभी संबंधित अधिकारियों की संपत्ति जांच, आयकर विवरण का परीक्षण एवं स्वतंत्र एजेंसी से जांच कर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री सचिवालय ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग रायपुर को निर्देशित किया गया है कि शिकायत पर नियमानुसार जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा आवेदक को सूचित किया जाए। साथ ही पूरी प्रक्रिया का विवरण जनदर्शन पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब इस मामले में विभागीय जांच और संभावित कार्रवाई पर क्षेत्र की जनता की नजरें टिकी हुई हैं

Facebook
Twitter
WhatsApp

Leave a Reply

[the_ad id="219"]
POLL
What does "money" mean to you?
  • Add your answer
BREAKING NEWS
LIVE CRICKET
REALTED POST
[the_ad id="242"]