छुईखदान/ अश्लील फोटोकांड: मोबाइल नंबर, डिजिटल ट्रोल और सियासी चर्चा के बीच सच की तला
छुईखदान। क्षेत्र में कथित “अश्लील फोटो” प्रकरण को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है। मोबाइल नंबरों की वायरल सूची, डिजिटल ट्रोलिंग और आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रशासन ने मामले को संवेदनशील मानते हुए सीमित जानकारी साझा की है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक महिला नेत्री की शिकायत पर जांच उपरांत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की विवेचना के लिए महिला डीएसपी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। यह समिति तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल सामग्री और संबंधित पक्षों के बयानों का परीक्षण करेगी।
इस संबंध में छुईखदान थाना प्रभारी शक्ति सिंह ने कहा कि उन्हें मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त नहीं है, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।

विधायक कोमल जंघेल
प्रकरण में नाम सामने आने पर विधायक कोमल जंघेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में उनका नाम घसीटे जाने से वे हैरान हैं। उनके अनुसार इससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में बिना ठोस प्रमाण के खबरों का प्रकाशन दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि जनता से उनका सीधा संवाद रहा है और वर्षों की तपस्या व जनसेवा के बाद उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया है और उन्हें विश्वास है कि जांच में सत्य सामने आएगा।
डिजिटल ट्रोल और जिम्मेदारी का सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपुष्ट सामग्री और मोबाइल नंबरों का प्रसार न केवल निजता का उल्लंघन है, बल्कि कानूनी अपराध भी हो सकता है। ऐसे मामलों में अफवाहों से बचना और आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा करना आवश्यक है।
निष्कर्ष
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाएगी। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दैनिक सरस्वती संकेत



