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शिक्षा विभाग बड़ी लापरवाही:जून बीतने के बाद भी…? लेकिन जिले के आत्मानंद सहित अन्य स्कूलों में अब तक नहीं मिली बच्चों को किताबें……?*

*शिक्षा विभाग बड़ी लापरवाही:जून बीतने के बाद भी…? लेकिन जिले के आत्मानंद सहित अन्य स्कूलों में अब तक नहीं मिली बच्चों को किताबें……?*

सरस्वती संकेत समाचार खैरागढ़ –

राज्य के कई जिले के आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के साथ-साथ अन्य शासकीय एवं राज्य के पुरे अशासकीय स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को अब तक शैक्षणिक पुस्तकों की आपूर्ति नहीं हो सकी है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होकर जून महीना बीतने को है, लेकिन बच्चों के हाथ में अब तक किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। इसका मुख्य कारण पुस्तकों की स्कैनिंग न हो पाना बताया जा रहा है।और इन्हीं सब कारणों से बच्चे स्कूल भी नहीं जा रहे हैं।

 

*प्रश्न खड़ा करता है यह सिस्टम…?*

 

जहां एक ओर शासन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बच्चों को पढ़ाई के सबसे मूलभूत साधन – किताबें – ही उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि जब पुस्तकें वितरित ही नहीं की गई हैं, तो छात्र पढ़ाई कैसे करेंगे?

 

*कौन है जिम्मेदार…?*

 

इस लापरवाही के लिए शिक्षा विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक की जवाबदेही तय होनी चाहिए। जून माह समाप्त हो गया है और छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी खामोश हैं। स्कैनिंग जैसे तकनीकी बहाने के पीछे छुपकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

 

अभिभावक परेशान, शिक्षक असहाय

एक ओर शिक्षक बिना किताबों के सीमित संसाधनों से पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर अभिभावक भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई जगहों पर पालकों द्वारा निजी स्तर पर किताबें खरीदने की भी कोशिश की जा रही है।

 

*क्या जल्द होगी आपूर्ति…?*

 

अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या पर कब जागता है और कितनी तत्परता से बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। वरना यह शैक्षणिक सत्र भी अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा।

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