[the_ad id="217"]

बच्चों के पार्क को निगल गया भू-माफियाओं का खेल ! राजा लालबहादुर की प्रतिमा हटाई, फिर मेंटेनेंस खसरे की जमीन को 22 टुकड़ों में बेचकर खड़ी कर दी करोड़ों की कॉलोनी

बच्चों के पार्क को निगल गया भू-माफियाओं का खेल !
राजा लालबहादुर की प्रतिमा हटाई, फिर मेंटेनेंस खसरे की जमीन को 22 टुकड़ों में बेचकर खड़ी कर दी करोड़ों की कॉलोनी
खैरागढ़। शहर की ऐतिहासिक और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर हुए कथित कब्जे और अवैध प्लाटिंग का मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। जिस जमीन पर कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, जहां “एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” और राजा लालबहादुर सिंह की प्रतिमा शहर की पहचान मानी जाती थी, आज उसी जमीन पर आलीशान कॉलोनियां, कॉम्प्लेक्स और निजी निर्माण खड़े दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मेंटेनेंस खसरे और सार्वजनिक उपयोग की जमीन निजी हाथों तक पहुंची कैसे?
राजनांदगांव-कवर्धा मुख्य मार्ग स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने प्लॉट नंबर 114 और 115 से जुड़े दस्तावेज अब प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहे हैं। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि प्लॉट नंबर 114एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” तथा प्लॉट नंबर 115 पार्क की बाड़ी के रूप में दर्ज था। स्वतंत्रता के बाद यहां राजा लालबहादुर सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई थी, लेकिन धीरे-धीरे प्रतिमा हटाई गई और उसके बाद जमीन का स्वरूप ही बदल दिया गया।
22 हिस्सों में बांटकर बेच दी गई जमीन
जांच दस्तावेजों के अनुसार करीब एक लाख वर्गफीट से अधिक भूमि को लगभग 22 टुकड़ों में विभाजित कर अलग-अलग लोगों के नाम दर्ज किया गया। बाद में इन जमीनों की दोबारा खरीदी-बिक्री भी होती रही। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से कॉलोनी का कोई वैधानिक ले-आउट स्वीकृत नहीं कराया गया, फिर भी निर्माण कार्य वर्षों तक चलता रहा।
सूत्रों के अनुसार लगभग 85 हजार वर्गफीट से अधिक जमीन पर अब निजी कब्जा हो चुका है और वहां बहुमूल्य संपत्तियां खड़ी हो गई हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब संबंधित विभागों को इस अवैध प्लाटिंग की जानकारी थी, तब रजिस्ट्री, नामांतरण और निर्माण कार्यों पर रोक क्यों नहीं लगाई गई?
क्या अधिकारियों के संरक्षण में चला पूरा खेल?
शहर में चर्चा है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर सार्वजनिक और मेंटेनेंस खसरे की जमीन की खरीदी-बिक्री संभव नहीं थी। यदि यह जमीन सार्वजनिक उपयोग की थी, तो आखिर किस अधिकारी ने इसे निजी कॉलोनी में बदलने की अनुमति दी? और यदि अनुमति नहीं दी गई, तो फिर वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यह मामला केवल अवैध प्लाटिंग का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति को व्यवस्थित तरीके से निजी कारोबार में बदलने का प्रतीत हो रहा है। अब नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और लोग पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
जनता पूछ रही है जवाब
बच्चों के पार्क की जमीन आखिर निजी संपत्ति कैसे बन गई?
राजा लालबहादुर सिंह की प्रतिमा क्यों हटाई गई?
बिना ले-आउट स्वीकृति के कॉलोनी कैसे काट दी गई?
रजिस्ट्री और नामांतरण करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
क्या भू-माफिया और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ यह पूरा खेल?
यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला आने वाले समय में बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
दैनिक सरस्वती संकेत, खैरागढ़
संपादक : राजेन्द्र सिंह चंदेल
📞 9406095724

Facebook
Twitter
WhatsApp

Leave a Reply

[the_ad id="219"]
POLL
What does "money" mean to you?
  • Add your answer
BREAKING NEWS
LIVE CRICKET
REALTED POST
[the_ad id="242"]