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कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में घटित घटनाक्रम को संविधान की पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र में जनजातीय परंपरा से टकराव का मामला: सर्व समाज ने छत्तीसगढ़ बंद का किया आह्वान

पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र में जनजातीय परंपरा से टकराव का मामला: सर्व समाज ने छत्तीसगढ़ बंद का किया आह्वा

खैरागढ़। टिकरापारा स्थित राम मंदिर परिसर में मंगलवार को सर्व समाज द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित कर बुधवार को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया गया। प्रेस वार्ता में सर्व समाज के सदस्यों ने कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में घटित घटनाक्रम को संविधान की पाँचवीं अनुसूची, ग्राम सभा की सर्वोच्चता और जनजातीय आस्था पर सीधा आघात बताया। प्रेस वार्ता के दौरान मनोज गिडिया, मोतीलाल यादव, डॉ साधना अग्रवाल, कमलेश रंगलानी, टीडी वर्मा सहित अन्य लोग शामिल थे।

प्रेस वार्ता के दौरान सर्व समाज के सदस्य भागवत शरण सिंह ने कहा कि यह मामला केवल एक गांव या एक समुदाय का नहीं है, बल्कि पूरे जनजातीय समाज की परंपरा, स्वशासन और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। उन्होंने बताया कि 15 से 18 दिसंबर के बीच जो घटनाएं हुईं, वे प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था की कठोर परीक्षा हैं।

मृत्यु के बाद शुरू हुआ विवाद, ग्राम सभा की अनदेखी का आरोप

सिंह ने बताया कि 15 दिसंबर को बड़ेतेवड़ा गांव निवासी चमरा राम सलाम की मृत्यु हुई। उसी रात उनका शव गांव लाया गया। 16 दिसंबर की सुबह अंतिम संस्कार को लेकर ग्राम समाज के परंपरागत पदाधिकारी और वरिष्ठ ग्रामीण एकत्रित हुए। इसी दौरान ग्राम सभा की अनुमति के बिना बाहरी व्यक्तियों—भीम आर्मी से जुड़े पदाधिकारी तथा पास्टर-पादरी—की उपस्थिति पाई गई।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि गांव का श्मशान स्थल पेन-पुरखा परंपरा और जनजातीय रीति-रिवाजों के अनुसार संचालित होता है और अंतिम संस्कार उसी विधि से होना चाहिए। आरोप है कि सरपंच राजमन सलाम और उनके परिजनों ने धमकीपूर्ण भाषा का प्रयोग करते हुए निजी भूमि में ईसाई रीति से शव दफन करने की घोषणा कर दी, जिससे गांव में तनाव फैल गया।

पुलिस मौजूदगी के बावजूद निजी भूमि में दफन, टकराव बढ़ा

सुबह लगभग 9 बजे पुलिस बल मौके पर पहुंचा, लेकिन समझाइश के बावजूद निजी भूमि में कब्र खोदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं। आरोप है कि अंततः शव को ईसाई रीति से निजी भूमि में दफन कर दिया गया, जो पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभा के अधिकारों और परंपरागत नियमों का उल्लंघन है।

घटना के बाद तहसीलदार व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उनके द्वारा दिए गए आवेदन को लेने से इनकार किया गया। प्रशासनिक उदासीनता के विरोध में सर्व समाज ने शांतिपूर्ण धरना शुरू किया।

हमले, घायल ग्रामीण और प्रशासन पर निष्क्रियता के आरोप

17 दिसंबर की सुबह प्रशासन के आश्वासन के विपरीत कब्र स्थल पर पक्का चबूतरा बनाए जाने की जानकारी सामने आई। इसी दौरान बड़ी संख्या में बाहरी लोगों द्वारा संगठित रूप से निहत्थे ग्रामीणों पर हमला किया गया, जिसमें करीब 25 ग्रामीण घायल हुए, जिनमें 11 को गंभीर चोटें आईं। भगवत शरण सिंह का आरोप है कि पुलिस ने हमलावरों के विरुद्ध अपेक्षित सख्त कार्रवाई नहीं की।

18 दिसंबर को स्थिति और बिगड़ गई। कुछ राजनीतिक व्हाट्सएप ग्रुप संदेशों और वीडियो के माध्यम से भीड़ जुटाने के प्रमाण सामने आए। इसके बावजूद निवारक कार्रवाई नहीं की गई। हजारों ग्रामीण शव हटाने की मांग को लेकर एकत्र हुए। दबाव में शव निकाला गया, लेकिन आरोप है कि पुलिस का बल प्रयोग मुख्यतः सर्व समाज के ग्रामीणों पर हुआ, जिससे कई लोग घायल हुए।

उच्च स्तरीय जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी

सर्व समाज ने मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। जनजातीय आस्था और परंपरा पर हमला करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही, जिला पुलिस अधीक्षक, अंतागढ़ एसडीएम और तहसीलदार की भूमिका की भी जांच कराई जाए।

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