[the_ad id="217"]

सरस्वती संकेत :::दुर्ग करहीडीह के MR लेआउट में करोड़ों की जमीन का खेल

🚨 सरस्वती संकेत :::दुर्ग करहीडीह के MR लेआउट में करोड़ों की जमीन का खेल?

 

एक ही जमीन की दोबारा रजिस्ट्री का आरोप, फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन हड़पने की शिकायत

23 और 36 टुकड़ों में प्लॉटिंग कर बिक्री का आरोप; SDM के दरबार में पहुंचा मामला

दुर्ग/करहीडीह। सिकोला बायपास से लगे ग्राम करहीडीह के MR लेआउट में जमीनों की खरीद-बिक्री को लेकर सामने आई शिकायतों ने राजस्व और पंजीयन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कुछ जमीनों को लेकर दोबारा रजिस्ट्री, वारिसों के अधिकारों की अनदेखी, फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी एवं हस्ताक्षर और अवैध प्लॉटिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामले में SDM दुर्ग के समक्ष शिकायत/अपील किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब सवाल यह है कि प्रशासन इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कब शुरू करेगा और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

🔴 केस नंबर-1 : 1.57 हेक्टेयर जमीन के 36 टुकड़े!

खसरा नंबर 102, रकबा 1.57 हेक्टेयर भूमि को लेकर शिकायत में बताया गया है कि यह जमीन पूर्व में कृष्णा राम पिता पूना राम द्वारा बेची गई थी।

शिकायत के अनुसार बिक्री के समय भूमि का खसरा नंबर 125/5 था, जो बंदोबस्त/सर्वे के बाद 102/1 हो गया।

आरोप है कि कृष्णा राम की मृत्यु के बाद उसी जमीन को उनके पुत्र-पुत्रियों को वारिसान बताकर पुनः बिक्री की प्रक्रिया में लाया गया और कथित रूप से 36 अलग-अलग प्लॉट बनाकर रजिस्ट्री कराई गई।

यदि यह आरोप दस्तावेजी जांच में सही पाया जाता है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि पहली बिक्री के बाद उसी भूमि पर दोबारा बिक्री का आधार क्या था?

🔴 केस नंबर-2 : मां की जमीन, फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का आरोप

खसरा नंबर 96 एवं 179, जो शिकायत के अनुसार दिलजीत कौर के नाम पर थी, उसे लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।

शिकायत में आरोप है कि प्रविन्दर सिंह चाने ने जमीन दलाल मनोज राजपूत के साथ मिलकर दिलजीत कौर की अनुपस्थिति में कथित रूप से फर्जी नोटरी पावर ऑफ अटॉर्नी एवं हस्ताक्षर के माध्यम से जमीन अपने नाम कराने की कार्रवाई की।

इसके बाद जमीन को कथित रूप से 23 प्लॉटों में बांटकर बेच दिया गया।

दिलजीत कौर द्वारा इस संबंध में SDM दुर्ग के समक्ष शिकायत/अपील किए जाने की बात सामने आई है।

अब जांच का सबसे बड़ा सवाल है—

पावर ऑफ अटॉर्नी किसने बनाई?

नोटरी के सामने कौन उपस्थित हुआ?

हस्ताक्षर किसके हैं?

रजिस्ट्री के समय विक्रेता की पहचान कैसे हुई?

और जमीन के असली मालिक की सहमति कहां थी?

🔴 4 एकड़ जमीन, 23 प्लॉट और वारिसों के अधिकार पर सवाल

खसरा नंबर 183, रकबा लगभग 4 एकड़, भूमि को लेकर भी विवाद सामने आया है।

शिकायत के अनुसार यह भूमि स्व. रणवीर सिंह चाने के नाम पर थी। उनकी मृत्यु के बाद पत्नी, तीन पुत्र एवं एक पुत्री के अधिकार/हिस्सेदारी का प्रश्न था।

आरोप है कि प्रविन्दर सिंह चाने ने जमीन दलाल मनोज राजपूत के साथ कथित सांठगांठ कर भूमि को अपने नाम कराने के बाद खसरा नंबर 183/1 एवं 183/2 सहित कई हिस्सों में बांटकर लगभग 23 प्लॉट बेच दिए।

स्व. रणवीर सिंह चाने की पत्नी दिलजीत कौर चाने एवं पुत्र कुलविंदर प्रीत सिंह द्वारा SDM के समक्ष शिकायत/अपील किए जाने की जानकारी सामने आई है।

❓ प्रशासन से दैनिक सरस्वती संकेत के 10 सीधे सवाल

1. विवादित जमीनों की मूल रजिस्ट्री किसके नाम और कब हुई?

2. खसरा नंबर बदलने के बाद पुराने और नए खसरा नंबर का रिकॉर्ड क्या कहता है?

3. क्या एक ही भूमि की दोबारा रजिस्ट्री हुई है?

4. विवादित पावर ऑफ अटॉर्नी की सत्यता की जांच कराई गई है या नहीं?

5. नोटरी रिकॉर्ड और गवाहों का सत्यापन हुआ या नहीं?

6. कथित रूप से बेचे गए 36 एवं 23 प्लॉटों की सभी रजिस्ट्रियों की जांच होगी या नहीं?

7. संबंधित भूमि का नामांतरण किस आधार पर किया गया?

8. क्या सभी वैधानिक वारिसों की सहमति/हस्ताक्षर लिए गए थे?

9. यदि फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है तो आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी या नहीं?

10. पीड़ित परिवारों की जमीन और खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रशासन तत्काल क्या कदम उठाएगा?

⚠️ जमीन आम आदमी की जिंदगी भर की कमाई है

करहीडीह के इन मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि जमीन के दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़ा और वारिसों के अधिकारों की अनदेखी होती रही तो आम नागरिक अपनी जमीन को लेकर भरोसा किस पर करे?

प्रशासन को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। मूल रजिस्ट्री, नामांतरण, खसरा रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी, नोटरी दस्तावेज, वारिसान रिकॉर्ड और सभी संबंधित प्लॉटों की रजिस्ट्रियों की जांच की जाए।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ राजस्व एवं आपराधिक कानून के तहत कठोर कार्रवाई होनी चाहिए तथा विवादित रजिस्ट्रियों को निरस्त कराने के लिए सक्षम न्यायालय/प्राधिकारी के समक्ष आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

दैनिक सरस्वती संकेत की मांग

न जमीन माफिया को संरक्षण मिले, न पीड़ित परिवार न्याय से वंचित हों।

दोषी कोई भी हो—उस पर कानून का शिकंजा कसना चाहिए।

दैनिक सरस्वती संकेत इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के परिणाम पर नजर बनाए रखेगा।

— राजेंद्र सिंह चंदेल

संपादक, दैनिक सरस्वती संकेत

मो. 9406095724

Facebook
Twitter
WhatsApp

Leave a Reply