एक टेबल पर तीन परीक्षार्थी! छुईखदान ओपन परीक्षा में व्यवस्था पर बड़ा सवाल
परीक्षा केंद्र बना अव्यवस्था का अड्डा या जिम्मेदारों ने नियमों को रख दिया ताक पर?
छुईखदान। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की परीक्षाएं विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण परीक्षा हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन, पारदर्शिता और निर्धारित व्यवस्था सुनिश्चित करना संबंधित शिक्षा अधिकारियों एवं परीक्षा केंद्र प्रबंधन की जिम्मेदारी है। लेकिन छुईखदान में आयोजित ओपन परीक्षा को लेकर सामने आए आरोपों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि परीक्षा केंद्र में एक टेबल पर तीन परीक्षार्थियों को बैठाया गया। सवाल यह है कि जब परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में प्रत्येक परीक्षार्थी के लिए पर्याप्त स्थान और अनुशासित बैठने की व्यवस्था आवश्यक है, तो आखिर एक ही टेबल पर तीन परीक्षार्थियों को बैठाने की नौबत क्यों आई?
क्या शिक्षा विभाग ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है?
परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल केंद्राध्यक्ष की नहीं होती, बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होती है। यदि वास्तव में परीक्षा केंद्र में क्षमता से अधिक परीक्षार्थियों को एक टेबल पर बैठाया गया है, तो यह महज अव्यवस्था नहीं बल्कि परीक्षा की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्र का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया?
क्या निरीक्षण के दौरान बैठने की व्यवस्था देखी गई?
यदि देखी गई तो फिर ऐसी व्यवस्था को अनुमति किस आधार पर दी गई?
और यदि निरीक्षण ही नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी परीक्षा केंद्रों की निगरानी किस आधार पर कर रहे हैं?
प्राचार्य और केंद्र प्रबंधन की भूमिका भी जांच के घेरे में
जिस परीक्षा केंद्र में यह कथित अव्यवस्था हुई, वहां के प्राचार्य/केंद्राध्यक्ष की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि उन्हें पहले से पता था कि परीक्षार्थियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त टेबल-कुर्सियां अथवा स्थान उपलब्ध नहीं है, तो अतिरिक्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
और यदि केंद्र प्रबंधन को समस्या की जानकारी ही नहीं थी, तो यह और भी गंभीर सवाल है कि परीक्षा केंद्र की तैयारी किसने और कैसे की?
शिक्षा विभाग को अब केवल खानापूर्ति वाली जांच नहीं, बल्कि मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए।
विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
ओपन स्कूल की परीक्षा देने वाले विद्यार्थी विभिन्न परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए अपनी शिक्षा पूरी करने का प्रयास करते हैं। उनके लिए परीक्षा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य बनाने का अवसर है।
ऐसे में यदि परीक्षा कक्ष में बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो शिक्षा विभाग की पूरी परीक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
एक टेबल पर तीन परीक्षार्थी बैठाने के आरोप की जांच केवल टेबल-कुर्सी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि परीक्षा केंद्र की स्वीकृत क्षमता कितनी है, वास्तविक परीक्षार्थियों की संख्या कितनी थी, कक्षवार बैठक व्यवस्था क्या थी, केंद्राध्यक्ष ने क्या रिपोर्ट दी और निरीक्षण करने वाले अधिकारी ने क्या पाया।
दोषी मिले तो कार्रवाई हो, केवल कागजी जांच नहीं
दैनिक सरस्वती संकेत शिक्षा विभाग से स्पष्ट रूप से मांग करता है कि इस मामले में तत्काल जांच कराई जाए।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित केंद्राध्यक्ष, प्राचार्य अथवा जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए सभी परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण कराया जाए।
शिक्षा विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि:
1. छुईखदान परीक्षा केंद्र पर कुल कितने परीक्षार्थी दर्ज थे?
2. परीक्षा कक्ष में कितनी टेबल और कुर्सियों की व्यवस्था थी?
3. एक टेबल पर कितने परीक्षार्थियों को बैठाने की अनुमति थी?
4. क्या विभागीय अधिकारी ने परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया था?
5. यदि निरीक्षण किया था तो निरीक्षण रिपोर्ट में क्या दर्ज किया गया?
6. कथित अव्यवस्था के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई?
7. क्या केंद्राध्यक्ष/प्राचार्य से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है?
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग कार्रवाई करता है या मामला फाइलों में दबा दिया जाता है
परीक्षा व्यवस्था में छोटी-सी लापरवाही भी विद्यार्थियों के अधिकारों और परीक्षा की निष्पक्षता पर असर डाल सकती है। इसलिए इस मामले को दबाने के बजाय तथ्यों के आधार पर सार्वजनिक जांच जरूरी है।
दैनिक सरस्वती संकेत का सवाल सीधा है—यदि परीक्षा केंद्र की व्यवस्था सही थी तो एक टेबल पर तीन परीक्षार्थी बैठाने की शिकायत कैसे सामने आई? और यदि व्यवस्था गलत थी तो जिम्मेदार कौन है?
अब गेंद शिक्षा विभाग के पाले में है।
जांच होगी या जिम्मेदारों को बचाने के लिए फिर वही पुरानी चुप्पी साध ली जाएगी?
— राजेंद्र सिंह चंदेल
संपादक, दैनिक सरस्वती संकेत
मो.: 9406095724





