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खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, छत्तीसगढ़ DEO की कार्यशैली पर विवाद के बीच पूर्व पदस्थापना के रिकॉर्ड की जांच की मांग

दैनिक सरस्वती संकेत

सटीक | निष्पक्ष | निर्भीक

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, छत्तीसगढ़

DEO की कार्यशैली पर विवाद के बीच पूर्व पदस्थापना के रिकॉर्ड की जांच की मां

शिक्षकों के सम्मान का मुद्दा गरमाया, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपेक्षा

खैरागढ़। जिला शिक्षा अधिकारी उपेंद्र कुमार देवांगन की कार्यशैली को लेकर कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद शिक्षा विभाग में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और शिक्षकों के सम्मान का मुद्दा चर्चा में है। फेडरेशन ने शिक्षकों के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार, दबावपूर्वक वचन पत्र भरवाने और एक्शन प्लान लागू कराने को लेकर आपत्ति जताई है। संगठन की शिकायतों पर अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।

पूर्व पदस्थापना के रिकॉर्ड की भी हो समीक्षा

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, छत्तीसगढ़

DEO की कार्यशैली पर विवाद के बीच पूर्व पदस्थापना के रिकॉर्ड की जांच की मांगपूर्व में जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विचारपुर में प्राचार्य के पद पर कार्यरत रहे हैं। ऐसे में पारदर्शिता की दृष्टि से उनकी पूर्व पदस्थापना से संबंधित विभागीय रिकॉर्ड, प्राप्त शिकायतों, जांचों और प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति की नियमानुसार समीक्षा किए जाने की मांग उठाई जा सकती है।

यदि पूर्व में कोई शिकायत प्राप्त हुई थी, तो उसकी वास्तविक स्थिति क्या रही? क्या किसी स्तर पर जांच हुई थी? क्या कोई विभागीय आदेश जारी हुआ था? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग के आधिकारिक अभिलेखों से ही मिल सकता है।

यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पूर्व पदस्थापना के दौरान किसी गंभीर घटना या शिकायत के संबंध में फिलहाल कोई प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी अपुष्ट आरोप को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

कलेक्टर के सामने जवाबदेही का सवाल

शिक्षा विभाग में अनुशासन और जवाबदेही आवश्यक हैं, लेकिन इनके साथ शिक्षकों की गरिमा तथा नियमानुसार प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है। फेडरेशन द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारी का पक्ष लिया जाना चाहिए। साथ ही, पूर्व पदस्थापना से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की मांग पर भी नियमानुसार विचार किया जा सकता है।

प्रशासन से अपेक्षित कार्रवाई

फेडरेशन के ज्ञापन पर निष्पक्ष जांच की जाए।

शिक्षकों और प्राचार्यों की शिकायतों के तथ्यों का सत्यापन किया जाए।

पूर्व पदस्थापना के दौरान प्राप्त शिकायतों एवं विभागीय कार्रवाई की स्थिति की आधिकारिक समीक्षा की जाए।

जांच के निष्कर्षों और की गई कार्रवाई की जानकारी नियमानुसार उपलब्ध कराई जाए।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है। शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक शिकायत की जांच तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर हो तथा जिम्मेदारी तय होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

राजेंद्र सिंह चंदेल

प्रधान संपादक

दैनिक सरस्वती संकेत, खैरागढ़

संपर्क: 9406095724

नोट: यह समाचार फेडरेशन की शिकायतों तथा पूर्व पदस्थापना के रिकॉर्ड की समीक्षा की मांग पर आधारित है। अपुष्ट आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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